dono taraf se rabt ke pahluu nikaal kar | दोनों तरफ़ से रब्त के पहलू निकाल कर

  - Ankit Maurya

दोनों तरफ़ से रब्त के पहलू निकाल कर
वो ले गया है आँख से आँसू निकाल कर

इनके सहारे कुछ नई सी धुन बनाऊँगा
लाया हूँ उसके पांव से घुंघरू निकाल कर

इक दिन किसी ने ले लिया कॉलेज में उसका नाम
गर्दन पे मैंने रख दिया चाक़ू निकाल कर

वो हुस्न भी लगे है मुझे तब से आम सा
जब से गया वो 'इश्क़ का जादू निकाल कर

झपकी थी मैंने आँख भी जिसके यक़ीन पर
वो जा चुका है नींद में बाज़ू निकाल कर

मुझको बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर
उसने दिया भी फूल तो खुशबू निकाल कर

  - Ankit Maurya

Rishta Shayari

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