दिल बदन के क़ैद से उस पार जाना चाहता है
ये परिंदा दूसरा अब आशियाना चाहता है
एक दिन यूँ ही लगा मुझ को गिनाने ऐब मेरे
वो भला किस मुँह से कहता छोड़ जाना चाहता है
कोई ले ले फ़ौरन उस के हाथ से गुब्बारे सारे
एक बच्चा जाने कब से मुस्कुराना चाहता है
— Ankit Maurya















