तालाब, दरिया, झील, समुंदर नहीं हुए
उस की निगाह-ए-नाज़ से बढ़कर नहीं हुए
कब से ख़ुदा समझ के जिसे पूजते रहे
उस की नज़र के साए भी हम पर नहीं हुए
सर से न एक शख़्स का नश्शा उतर सका
सो हम नशे में धुत कभी पी कर नहीं हुए
जितने उदास हम तुझे खो कर हुए हैं आज
इतने तो ख़ुश कभी तुझे पाकर नहीं हुए
तू जिस तरफ़ भी जाए उधर चल पड़ेगे दोस्त
हम तेरे साथ सोच-समझकर नहीं हुए
दुनिया तुली थी हम को बनाने पे देवता
पर हम किसी भी हाल में पत्थर नहीं हुए
— Ankit Maurya















