कितना हसीन ख़्वाब था आँखों में रह गया
वो चेहरा माहताब था आँखों में रह गया
मैं जैसे कोई ख़ार था चुभने लगा उसे
वो तो कोई गुलाब था आँखों में रह गया
मैं ने तो तेरी मर्ज़ी से बोला था झूठ पर
जो अस्ल में जवाब था आँखों में रह गया
लौटा दिए हैं उस ने मेरे ख़त वग़ैरा सब
बाक़ी का जो हिसाब था आँखों में रह गया
ऐसा नहीं मेरा कभी कोई नहीं था पर
मैं कह रहा जनाब था, आँखों में रह गया
अच्छा था जो भी फ़िल्म में यूँ ही गुज़र गया
वो सीन जो ख़राब था आँखों में रह गया
— Ankit Maurya















