ये कभी सोचा नहीं था आप भी ऐसा करेंगे

जब बिछड़ जाएँगे हम से तो हमें रुसवा करेंगे

बोल तो देते हैं ग़ुस्से में कि "तुम जाओ यहाँ से"
बा'द में फिर सोचते हैं ये हुआ तो क्या करेंगे?

उस के झगड़े पे कभी गर डाँट दूँ तो बोलता है
आप से है प्यार तो फिर किस से हम झगड़ा करेंगे

एक चेहरा जो कि हम से ना कभी भी बन सका है
एक चेहरा वो कि जिस को उम्र भर सोचा करेंगे

तेरी जानिब जब रहेंगी महफ़िलों की सब निगाहें
अपनी आँखों से तेरे चेहरे पे हम पर्दा करेंगे

है समझना आप को तो शे'र से इज़हार समझें
बात कहने को भला हम फूल क्यूँ तोड़ा करेंगे

— Ankit Maurya

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