है ज़रूरी मेरी ज़िन्दगी के लिए
लौट आओ घड़ी दो घड़ी के लिए
तेरे जाने से ऐसी हुई तीरगी
दिल जलाना पड़ा रौशनी के लिए
हम ने देखी है उन की भी रंगीनियां
वो जो मशहूर हैं सादगी के लिए
जान जाती है यूँ तो जुदाई में पर
हम जुदा होंगे तेरी ख़ुशी के लिए
राह तकती हैं मेरी भी नदियाँ कई
ख़ुद को प्यासा रखा इक नदी के लिए
हौसला है तो लड़ ज़िन्दगी से ऐ दोस्त
बुज़दिली चाहिए ख़ुद-कुशी के लिए
— Ankit Maurya















