शिद्दत से मुझ सेे हाथ छुड़ाने के बावजूद

थोड़ा सा रह गया है वो जाने के बावजूद

अपने सफ़र के वक़्त मैं तन्हा ही रह गया
इक उम्र दोस्तों पे लुटाने के बावजूद

कोई सवाल ज़िंदगी का हल नहीं हुआ
पढ़ने में सारी उम्र गवांने के बावजूद

अपना हम एक शख़्स इकट्ठा न कर सकें
अपनों के बीच शोर मचाने के बावजूद

लैला नहीं मिली, सो मैं मजनू न बन सका
सहरा में खूब ख़ाक उड़ाने के बावजूद

अक्सर ही छूटती रही है ज़िंदगी की रेल
अपनी घड़ी से वक़्त पे आने के बावजूद

हैरत है मेरे हाथ सलामत हैं अब तलक
शो'ला बदन को हाथ लगाने के बावजूद

— Ankit Maurya

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