ज़िंदगी में वो पराया रह गया
शख़्स जो दिल में समाया रह गया
ग़ौर से इक बार देखा था उसे
ख़्वाब तक में वो ही छाया रह गया
कल जो उस ने हाथ थामा प्यार से
यार मैं फिर अक-बकाया रह गया
था जो मेरा वो भी मुझ से छीन कर
पास मेरे क्या ख़ुदा-या रह गया
आँख तक जज़्बात मेरे आ गए
मुट्ठियाँ फिर भी दबाया रह गया
हैं मुझे गर दुख तो छोटी बात का
प्यार था जो भी वो ज़ाया' रह गया
— Ankit Dixit















