
जिसे तुम अपना समझ रहे हो उसी को दिल से लगा रहे हो
अगर वो फिर भी ना हो तुम्हारा बताओ मुझ को तो क्या करोगे
वो पास आतिश के ही खड़ा है जिसे मुहाफ़िज़ समझ लिया है
करे जो आँधी को इक इशारा बताओ मुझ को तो क्या करोगे
— Ansar Etavi
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