
मैं जैसा चाहूँ ये क़िस्मत कभी वैसा नहीं रखती
बहुत खिलवाड़ करती है कभी अच्छा नहीं रखती
फटा सा नोट हूँ हर बार तो मैं चल नहीं सकता
दवा अपना असर हर बार के जैसा नहीं रखती
— Ansar Etavi
Other sher from the same pen
Shers of kismat.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling