aankh ke motiyon ko na zaayaa' karo | आँख के मोतियों को न ज़ाया' करो

  - anupam shah

आँख के मोतियों को न ज़ाया' करो
अश्क़ यूँँ ही न अपने बहाएा करो

खलवतों में है जीने की बस ये अदा
आइना देखकर मुस्कुराया करो

लिख दिया चाँद को तुमने क्यूँ दिल मिरा
चाँद को इतना सर न चढ़ाया करो

बांधकर उंगलियों से मेरी उंगलियां
प्यार बढ़ता है इसको बढ़ाया करो

जोड़कर ज़िन्दगी से मेरी ज़िंदगी
जो है आधा उसे तुम सवाया करो

बात करने का है इक सलीक़ा यही
एक सुन कर के दूजी सुनाया करो

यूँँ करो संग मेरे ज़रा सा चलो
इस तरह से न हमको पराया करो

आपके लब प' है मिस्रियों की डली
कोई वा'दा करो तो निभाया करो

  - anupam shah

Chaand Shayari

Our suggestion based on your choice

More by anupam shah

As you were reading Shayari by anupam shah

Similar Writers

our suggestion based on anupam shah

Similar Moods

As you were reading Chaand Shayari Shayari