
चलो फिर इश्क़ करते हैं, रगों में आग भरते हैं
अभी उबरे कहाँ थे तुम, चलो फिर डूब मरते हैं
कभी दिल हो तो आना लौट कर मेरे ही कूचे पर
सुना है दिल-जले आशिक़ मोहब्बत ख़ूब करते हैं
— anupam shah
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