faqat is baat se naasaaz hooñ main | फ़क़त, इस बात से, नासाज़ हूँ मैं

  - A R Sahil "Aleeg"

फ़क़त, इस बात से, नासाज़ हूँ मैं
नज़र से ही, नज़र अंदाज़ हूँ मैं

बहुत मुश्किल है, अब मेरा संवरना
किसी का 'इश्क़ हूँ, नासाज़ हूँ मैं

रहोगे, मेरे बिन, तुम कैसे ज़िंदा?
तुम्हारी धड़कनों का, साज़ हूँ मैं

वो, जिसको दुश्मनी है, सख़्त मुझसे
उसी ज़ालिम का ही, हमराज़ हूँ मैं

मुक़द्दर में, न था, वस्ल ए समाअत
ये माना, दिल की इक आवाज़ हूँ मैं

कहा है, मौत ने, ये ज़िन्दगी से
तू चिड़िया है, तो सुन ले, बाज़ हूँ मैं

पड़ी है, पाँव में ज़ंजीर लेकिन
अभी तक, माइल ए परवाज़ हूँ मैं

सलामी, दे रहा है, वक़्त मुझको
नए इस दौर का, आग़ाज़ हूँ मैं

समुंदर में, बना लूंगा मैं रस्ता
असा हूँ रब का, वो एजाज़ हूँ मैं

  - A R Sahil "Aleeg"

Zindagi Shayari

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