jo ho chuka hai tazkira uskaa bhi kya karen | जो हो चुका है तज़्किरा उसका भी क्या करें

  - A R Sahil "Aleeg"

जो हो चुका है तज़्किरा उसका भी क्या करें
माज़ी की दास्तान का चर्चा भी क्या करें

सोया हुआ नसीब जगाया भी क्या करें
मस्जिद में जा के सर को झुकाया भी क्या करें

उसका है दिल, ये हक़ है उसे चाहे जिस को दे
अब उस जफ़ा-शि'आर से झगड़ा भी क्या करें

मशहूर जब हो नाम से मेरे जहाँ में तुम
है 'इश्क़ जग-अयाँ तो छुपाया भी क्या करें

क़ब्ज़ा अज़ल से 'इश्क़ पे है ख़ार-ज़ार का
बंजर ज़मीं पे दिल की उगाया भी क्या करें

शादी की उस ने ग़ैर से ससुराल जा बसी
बे-वज्ह उस के शहर में जाया भी क्या करें

आँखों पे उसने बाँध ली दौलत की जब रिबन
अपनी वफ़ा ये उस को दिखाया भी क्या करें

मुर्दा है 'इश्क़ जज़्ब-ओ-जुनूँ भी हैं पाश-पाश
पाने की अब तो उस को तमन्ना भी क्या करें

हम चाहते हैं ख़ाक में मिल जाए ख़ाक ये
इसको बदन के नाम पे‌ ढोया भी क्या करें

हमको ये इल्म है कि हमारा नहीं ख़ुदा
'साहिल' कोई दुआ, कोई तौबा भी क्या करें

  - A R Sahil "Aleeg"

Mehndi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by A R Sahil "Aleeg"

As you were reading Shayari by A R Sahil "Aleeg"

Similar Writers

our suggestion based on A R Sahil "Aleeg"

Similar Moods

As you were reading Mehndi Shayari Shayari