मैं ने माँगी दु'आ थी निय्यत से
माँगा था तुझ को मैं ने जन्नत से
है तिरे दिल में जो वही रस्ता
तू नहीं मिलता वर्ना मन्नत से
कोई पहले से दिल लिए बैठा
मिल ही जाता तू वर्ना मुद्दत से
कितना है ख़ुश नसीब फिर वो शख़्स
जिस को चाहा है तू ने शिद्दत से
मुझ को ये बात मान लेनी थी
ज़िंदगी में नहीं तू क़िस्मत से
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