कम तो नहीं ग़म ज़िंदगीहै इश्क़ भी याँ दिल-लगीउस की कहीं है नग़्मगीतड़पाती है ये तिश्नगीमेरा ख़ुदा महबूब हैजाती नहीं अब बंदगीमुझ को यक़ीं अब भी नहींवो है लिखा ता-ज़िंदगीआशिक़ जो दर दर था फिरापूछा तो पाया रफ़्तगीउस से मुहब्बत कम नहींफिर भी मुहब्बत रेज़गी— Ashish Junglan