तेरी यादों का दिल में यूँँ बरसात है
तुम नहीं हो यहाँ ये ग़लत बात है
अब सुनाऊँ किसे दर्द-ए-दिल की सदा
मेरा है ही नहीं जो मेरे साथ है
तोड़ कर आओ तुम अब सभी बंदिशें
यूँ न रूठो सनम वस्ल की रात है
दिल-लगी में सनम ये मुझे क्या दिया
ये मुहब्बत नहीं कोई ख़ैरात है
अपने दिल की ज़मीं दे रहा हूँ तुम्हें
ये मेरे प्यार की कोई सौग़ात है
— Saroj Kumar















