
मेरी आँखों के पानी से तेरी तस्वीर बनती है
सियासत से करो तौबा यही ज़ंजीर बनती है
मेरी मेहनत को देखो बस लकीरों का न पूछो तुम
मेरी माँ की दु'आओं से मेरी तक़दीर बनती है
— Saroj Kumar
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