dekh uskaa 'ishq bhi sar men rakha hai | देख उसका 'इश्क़ भी सर में रखा है

  - Aves Sayyad

देख उसका 'इश्क़ भी सर में रखा है
एक आसेब आज भी घर में रखा है

हम ज़मीं वाले रखे हैं दरमियाँ में
बोल ना अल्लाह क्यूँ डर में रखा है

ढूँढती वो रह गई ख़त पाँव में कल
ख़त, कबूतर बोल ना, पर में रखा है

देख हँसता है मेरी तन्हा ख़मोशी
कौन सा जिन्नात इस घर में रखा है

ख़ौफ़ का माहौल उसके दिल मकाँ में
भूत उसने पाल कर, दर में रखा है

शे'र मारे हैं ग़ज़ल सब आग में है
ऐब ये तेरे सुख़न-वर में रखा है

हर हसीना से रखे हैं रब्त हमने
'इश्क़ सय्यद का नगर भर में रखा है

  - Aves Sayyad

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