'ishq ki raah men phoolon ki kahaanii to nahin | 'इश्क़ की राह में फूलों की कहानी तो नहीं

  - Aves Sayyad

'इश्क़ की राह में फूलों की कहानी तो नहीं
ग़म हक़ीक़त है कोई ख़ाम-ख़याली तो नहीं

कितना कुछ मैंने समेटा है अभी मिस्रों में
याद आया प' ग़ज़ल उनको सुनानी तो नहीं

जो लिखे मैंने तुम्हें ख़त वो तुम्हें दूँगा पर
पहले तुम मेरी क़सम खाओ पढ़ोगी तो नहीं

मुश्किलें और भी आएगी मुहब्बत के सिवा
ज़िंदगी बस तेरी यादों में बितानी तो नहीं

देखना है कि तुझे कौन यहाँ चाहेगा
बे-वफ़ाई तेरी लोगों से हिजाबी तो नहीं

मुझ सेे हालात में जी लोगे बिखर जाओगे
तोहमतें जिस्म का हिस्सा है लिबासी तो नहीं

मैं तो मैं ही था मेरा क़त्ल भी ज़ाया' ही गया
देखने वाले की फ़ितरत ही ख़मोशी तो नहीं

जो भी आएगा ज़मीं ओढ़ के सो जाएगा
ये फ़क़ीरों का ठिकाना है हवेली तो नहीं

अभी सय्यद तेरी बातों का सिला बाक़ी है
ख़ून आँखों में भरा है ये उदासी तो नहीं

  - Aves Sayyad

Udas Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aves Sayyad

As you were reading Shayari by Aves Sayyad

Similar Writers

our suggestion based on Aves Sayyad

Similar Moods

As you were reading Udas Shayari Shayari