ये किस मक़ाम पे ठहरे क़दम तमाशा है
मेरे ख़िलाफ़ मेरा जिस्म-ज़म तमाशा है
तुम्हारे ग़म ने दिवाना बना के रक्खा है
तुम्हारी याद में फिर चश्म-ए-नम तमाशा है
दिलों में वहशतें रह रह के रक़्स करती हैं
दिलों में क्या ये तमाशा भी कम तमाशा है
बहुत से रस्ते बहुत मंज़िलों के बाद खुला
हसीन रस्तों की मंज़िल का ग़म तमाशा है
हमारी साँस में ख़ुशबू तुम्हारी शामिल है
हमारी धड़कनों में दम-ब-दम तमाशा है
ख़ुशी से उसने गले लग के ये कहा 'सय्यद'
तुम्हारे बाद तुम्हारा क़लम तमाशा है
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