तुम साथ रक़ीबों के जी हाँ ख़ुश तो रहोगे
ये बात अलग है के मुझे याद करोगे
पहले तेरे ख़ातिर वो दिवाना हो चलेगा
फिर उस के भी लब से मेरे ही शे'र सुनोगे
यादें तेरी भूलाने लगा दूर मैं रह कर
तुम लो बुला मुझ को नहीं तो हाथ मलोगे
बच्चे भी तेरे खींच के लायेगे यहाँ जब
महफ़िल से मेरी तब भला फिर कैसे उठोगे
कमरे में रखोगे मेरा ही चाँद सजा कर
तोहफ़ा वो तुम्हें दूँगा के तुम याद रखोगे
मुझ को कहीं देखो तो नज़र फेर ही लेना
तुम ख़ामख़ा किस्मत पे भी फिर रोने लगोगे
सय्यद को नवाजेगा वो जब देखना उस दिन
तुम देख मुझे जान हसदस ही मरोगे
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Aves Sayyad
our suggestion based on Aves Sayyad
As you were reading Rahbar Shayari Shayari