मोहब्बत में गुज़ारा हो गया क्या
बताओ वो सहारा हो गया क्या
जिसे अपना कभी कहते थे सब से
ज़रा देखो हमारा हो गया क्या
उलझने ज़िंदगी में चल रही हैं
बताओ वो तुम्हारा हो गया क्या
कई दिन हो गए हैं उस को देखे
वो चेहरा और प्यारा हो गया क्या
अलग होकर के जो तुम ख़ुश हुई हो
नया रिश्ता तुम्हारा हो गया क्या
वफ़ा की बात जो करता था 'रंजन'
वही झूठा दुबारा हो गया क्या
— ABHISHEK RANJAN















