वो वा'दा कर के मुकर गई है दिल अब भी वा'दा निभा रहा है
तड़प रहा है मचल रहा है बता भी दो दिल बुला रहा है
गई है रिश्ते को तोड़कर के मैं तोड़ दूँ फिर ये इश्क़ कैसा
हाॅं उस तरफ़ से तो कुछ नहीं है दिल इस तरफ़ से निभा रहा है
दिलों के टुकड़े हाँ टुकड़े कर के बिखेर डाला है यूँॅं फ़लक में
बिखर गया है हाँ फिर भी देखो तुम्हीं को अपना बता रहा है
न मैं हूँ ग़ालिब न जौन हूँ मैं न मैं हूँ राहत हाॅं कौन हूँ मैं
मैं पूँजी हूँ ना हाँ उस पिता की वही तो सब कुछ सिखा रहा है
यही हक़ीक़त यही फ़साना हाँ मेरे मालिक उसे बताना
वो छोड़ देगा हाँ कुछ दिनों में ये उस का आशिक़ बता रहा है
— ABHISHEK RANJAN















