ये भला कैसी जसारत कर ली
नहीं करना था मोहब्बत कर ली
बाप को एक नज़र देख लिया
ऐसा लगता है ज़ियारत कर ली
जो मुझे कहता ख़ुदा फिरता था
काम निकला तो अदावत कर ली
जिसे कहता था मेरा अपना है
वक़्त आया तो बग़ावत कर ली
ऐसा मंज़र भी पढ़ा है रंजन
भाई को मार हुकूमत कर ली
— ABHISHEK RANJAN















