मेरी वाली
नज़रों ही नज़रों में बातें करती है
अपने ही धुन में वो खोई रहती है
पैसा दौलत की उस को परवाह नहीं
इश्क़ में सच्चा मजनूॅं उस को भाता है
लंबी है माना पर दिल की सच्ची है
जैसी भी हो मेरी वाली अच्छी है
ज़ुल्फ़ बिखेरे गलियों में जब घू
में वो
ख़्वाहिश मेरी मेरा माथा चू
में वो
मैं रक्खूॅं रोज़ा वो भी उपवास करे
हर लम्हा हर पल वो मेरे साथ रहे
मुझ को देखे मुझ को सोचे बात करे
मेरे ही ख़्वाबों में वो दिन रात करे
ऐ मालिक तू मेरा उस को कर देना
हाथ में मेहॅंदी मेरे नाम की भर देना
— ABHISHEK RANJAN















