"मैं"
मुझे मालूम है ये मैं कहाँ हूँ
अभी तन्हाइयों में जी रहा हूँ
वो लड़का कुछ नहीं कर पाएगा अब
ये तोहमत मुस्कुरा के लिख रहा हूँ
दिवाली में भी घर सुनसान मेरा
महज़ परछाइयों का यक-जहाँ हूँ
तुम्हारे बा'द देखो क्या हुआ है
मैं अपनी मौत के दिन गिन रहा हूँ
जो मेहनत कर रहे हो हारना मत
मैं क़िस्मत का नहीं तेरा जहाँ हूँ
कहेगा कौन इस हालत में 'रंजन'
ज़रा ठहरो मैं तेरा हम-रहाँ हूँ
— ABHISHEK RANJAN















