"तेरे साथ पूरा"
मैं ख़ुद हूँ मुकम्मल
मैं ख़ुद हूँ अधूरा
मुझे चाह तेरी
तेरे साथ पूरा
तू हसरत है मेरी
तू चाहत है मेरी
सही जाए मुझ से
ये दूरी न देरी
तेरे पास आ कर
सिमट तुझ में जाऊँ
जहाँ देखें नज़रें
वहाँ तुझ को पाऊँ
लगे जब बिगड़ने
ये हालत भी मेरी
मुझे थाम लेना
तू बाहों में तेरी
तू दिलबर है मेरा
तू दिलदार मेरा
तू दोपहर मेरी
तू मेरा सवेरा
तेरे से ही हर शाम
होती हैं बातें
कभी भी न कटती
बिना तेरे रातें
तू मेरा है साथी
तू मेरा है हमदम
तुझे पीके भूले
ये “जस्सर” सभी ग़म
तेरे साथ भूले
ये “जस्सर” सभी ग़म
— Avtar Singh Jasser















