
जीने के और भी जहाँ में बंद-ओ-बस्त थे
ये और बात थी कि हम बादा'परस्त थे
तू आ चुका था फिर भी तेरा इंतिज़ार था
हम याद में 'जस्सर' तेरी इस दरजा मस्त थे
— Avtar Singh Jasser
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