dil hamaara ho gaya veeraan sehra ki tarah | दिल हमारा हो गया वीरान सहरा की तरह

  - Ayush Charagh

दिल हमारा हो गया वीरान सहरा की तरह
मर गया प्यासा यहाँ हर ख़्वाब चिड़िया की तरह

इस का अपनी ही रवानी पर नहीं है इख़्तियार
ज़िंदगी शिव की जटाओं में है गंगा की तरह

हर मुक़दमा दे रहा है जिस्म पर कोड़े हज़ार
मैं अदालत में रखा हूँ पाक गीता की तरह

या तो कोई चाहने वाला यहाँ मेरा न हो
और कोई हो तो हो राधा या मीरा की तरह

ज़िंदगी मेरी अब उस की क़ब्र में महफ़ूज़ है
वो जो मेरे दिल में रहता है तमन्ना की तरह

एक दिन मुमकिन है मैं इस्लाम का चेहरा बनूँ
दरमियाँ लोगों के हूँ फ़िलहाल चर्चा की तरह

दाग़ हैं जान-ओ-जिगर में दिल बना है आग से
'मीर' हूँ पर हैं मिरे अशआ'र 'सौदा' की तरह

  - Ayush Charagh

Qabr Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ayush Charagh

As you were reading Shayari by Ayush Charagh

Similar Writers

our suggestion based on Ayush Charagh

Similar Moods

As you were reading Qabr Shayari Shayari