dhoop men saaya bane tanhaa khade hote hain | धूप में साया बने तन्हा खड़े होते हैं

  - Azhar Faragh

धूप में साया बने तन्हा खड़े होते हैं
बड़े लोगों के ख़सारे भी बड़े होते हैं

एक ही वक़्त में प्यासे भी हैं सैराब भी हैं
हम जो सहराओं की मिट्टी के घड़े होते हैं

आँख खुलते ही जबीं चूमने आ जाते हैं
हम अगर ख़्वाब में भी तुम से लड़े होते हैं

ये जो रहते हैं बहुत मौज में शब भर हम लोग
सुब्ह होते ही किनारे पे पड़े होते हैं

हिज्र दीवार का आज़ार तो है ही लेकिन
इस के ऊपर भी कई काँच जड़े होते हैं

  - Azhar Faragh

Nigaah Shayari

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