दूर साया मेरा मुझ से तो हो गया
जिस को पाना था लेकिन वही खो गया
आरज़ू थी बड़ी दिल में मेरे तो पर
जाते जाते वो तो पेड़ ग़म बो गया
कितना ही रास्ता देख लो उस का तो
करता ही अब नहीं वापसी जो गया
राह में मुझ को हमराही इक वो मिला
उम्र भर वो उदासी में अब ढो गया
जब से उम्मीद टूटी है मेरी तो अब
ख़्वाब उस दिन से ही मेरा तो सो गया
— Shubham Upwan














