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मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा  - Bashir Badr

मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा
तुम्हारा फ़ैसला था याद होगा

बहुत से उजले उजले फूल ले कर
कोई तुम से मिला था याद होगा

बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें
कोई आँसू गिरा था याद होगा

उदासी और बढ़ती जा रही थी
वो चेहरा बुझ रहा था याद होगा

वो ख़त पागल हवा के आँचलों पर
किसे तुम ने लिखा था याद होगा

Bashir Badr
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Tanhai Shayari

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