एक गहरा ज़ख़्म था अब भर चुका हैख़ुद के दिल पर क़ाबू कोई कर चुका हैलापता है एक आशिक़ जो था मुझमेंसच कहूँ तो वो भी कब का मर चुका है— Bhuwan Singh