kuchh is tarah dil se 'ishq us ka nikaalna hai | कुछ इस तरह दिल से 'इश्क़ उस का निकालना है

  - Charagh Sharma

कुछ इस तरह दिल से 'इश्क़ उस का निकालना है
बग़ैर गुल्लक को तोड़े सिक्का निकालना है

मैं जानता हूँ मोहब्बतों का मक़ाम-ए-आख़िर
सो उस के कमरे से मुझ को पंखा निकालना है

निकाल फेंकी घड़ी कलाई से उस की दी हुई
अब अपने ख़ातिर इक-आध घंटा निकालना है

ज़मीन खोदें जिन्हें बनानी हैं क़ब्र-गाहें
ज़मीन जोतें जिन्हें ख़ज़ाना निकालना है

निकाल लाया जो मुझ को लहरों की साज़िशों से
मुझे समुंदर से अब वो तिनका निकालना है

  - Charagh Sharma

Ulfat Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Charagh Sharma

As you were reading Shayari by Charagh Sharma

Similar Writers

our suggestion based on Charagh Sharma

Similar Moods

As you were reading Ulfat Shayari Shayari