mirii udaasi mire darmiyaan band karo | मिरी उदासी मिरे दरमियान बंद करो

  - Charagh Sharma

मिरी उदासी मिरे दरमियान बंद करो
कोई सलीक़े से ये इत्र-दान बंद करो

पढ़ा रहा हूँ मैं बच्चों को कर्बला का निसाब
तुम अपनी तिश्ना-लबी का बखान बंद करो

ज़रा समझने की कोशिश करो मिरे अश्को
वो आज ख़ुश है तुम अपनी ज़बान बंद करो

मैं एक शर्त पे राज़ी हूँ क़ैद होने को
इसी क़फ़स में मिरा आसमान बंद करो

मुझे अकेले में करनी हैं ख़ुद से कुछ बातें
ये मेरा हुक्म है दीवारो कान बंद करो

ग़ज़ल में लाने से ग़म और बढ़ गया है 'चराग़'
शटर गिराओ सुख़न की दुकान बंद करो

  - Charagh Sharma

Mehnat Shayari

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