jo she'r tere khat ki ibaarat men kaam aa.e | जो शे'र तेरे ख़त की इबारत में काम आए

  - Charagh Sharma

जो शे'र तेरे ख़त की इबारत में काम आए
वो ही मुशायरों की निज़ामत में काम आए

लाया तो था मैं और किसी काम से मगर
शायद ये फूल अब मिरी मय्यत में काम आए

वो आ गया था मेरी गिरफ़्त-ए-वफ़ा में पर
उस पर फ़रेब थे जो ज़मानत में काम आए

फेंकी है मेरे घर में मिरे दोस्त ने जो ईंट
शायद वो मेरे घर की मरम्मत में काम आए

अश्कों की जाएदाद तो कर दी ग़ज़ल के नाम
जो क़हक़हे बचे थे मुसीबत में काम आए

हाँ ऐसे दोस्त की भी ज़रूरत नहीं मुझे
जो सिर्फ़ और सिर्फ़ ज़रूरत में काम आए

  - Charagh Sharma

Friendship Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Charagh Sharma

As you were reading Shayari by Charagh Sharma

Similar Writers

our suggestion based on Charagh Sharma

Similar Moods

As you were reading Friendship Shayari Shayari