थक जाता हूँ रोज़ के आने जाने में
मेरा बिस्तर लगवा दो मयख़ाने में
"उसके हाथ में फूल है" मत कहिए, कहिए
उसका हाथ है फूल को फूल बनाने में
मैं कबसे मौक़े की ताक में हूँ ,उसको
जाने मन कह दूं जाने अनजाने में
आँखों में मत रोक, मुझे जाना है उधर
ये रस्ता खुलता है जिस तहख़ाने में
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