एक साल
ओ मेरे दिल के टुकड़े
मेरी बहना मेरी बेटी मेरे बच्चे
आज एक साल हो गया
तुम्हें बाशिंदा ए अदम-आबाद हुए
मेरी छोटी-सी दुनिया को बर्बाद हुए
जैसे ये ख़ुशबू धूप अब्र-ओ-बाद हुए
तुम्हें आज़ाद हुए मुझे शब-ज़ाद हुए
तुम से कोई विवाद हुए मुझे ना-मुराद हुए
इस दिल को ना शाद हुए
तुम्हें महज़ एक याद हुए
मेरी बेटी
आज एक साल हो गया
मुक़द्दर को बिगड़े हुए मुझे तुम से बिछड़े हुए
इस घर को उजड़े हुए इस दिल के टुकड़े हुए
बैठा रहता हूँ मैं तेरी तस्वीर को पकड़े हुए
बैठी है तेरी याद दिल में दिल को जकड़े हुए
तेरे मेरे झगड़े हुए और मुझे तुझ पे अकड़े हुए
अभागे बाप के मुखड़े से
एक आँख को लिकड़े हुए
अभागे भाई के कांधे से
एक बाज़ू को उखड़े हुए
मेरी बेटी
आज एक साल हो गया
ख़ुशियों को घर छोड़े हुए
ख़ुदा को मुक़द्दर फोड़े हुए
घर की तरफ़ सैलाब को मोड़े हुए
मेरी नींद को छीने ख़्वाब को तोड़े हुए
डाॅक्टर के पैरो में लौटे हुए हाथों को जोड़े हुए
तुझ को ये दुनिया छोड़े हुए
मुझे दुनिया से सब नाते तोड़े हुए
मेरी बेटी
आज एक साल हो गया
घर में उदासी को छाए हुए
इन होंटों पर हॅंसी को आए हुए
पिताजी को क़िस्से सुनाए हुए
बगिया में फूलों को आए हुए
ऑंगन में सन्नाटा छाए हुए
पीठ पर तेरा चाटा खाए हुए
मुझ को गाना गाए हुए
जी से कोई खाना खाए हुए
दिल को पत्थर करे हुए
याद में तेरी आँसू बहाए हुए
मेरी बेटी
आज एक साल हो गया
मुझे कुछ लिखे हुए तुझे कहीं दिखे हुए
मुझे चैन से सोए हुए तेरी याद में खोए हुए
तेरी आवाज़ सुने हुए तेरे साथ तारों को गिने हुए
तुझे मुझ से छीने हुए आज बारह महीने हुए
ख़ुश रंग ख़्वाबों को किसी नज़र की आग में जले हुए
हमारे आशियाँ के सूरज को ढले हुए
जिन
में मिस्मार हो गई झोपड़ी अपनी
उन ऑंधियों को चले हुए
इन आँखों और रुख़सारों को गिले हुए
मुझे तुझ से मिले हुए
मेरी बेटी
आज एक साल हो गया
भरने थे जो ज़ख़्म जिगर के
वक़्त के साथ सिर्फ़ गहरे हुए हैं
हम समुंदर में डूबी उस कश्ती की राह में
आज भी किनारे पर ठहरे हुए हैं
हर किसी ने शुरू में कहा था
“ह
में भी दर्द बस शुरू में रहा था”
अभी यक़ीन नहीं होगा दिल भी ग़मगीन नहीं होगा
एक वक़्त पर जा चुका है दिल मान जाता है
एक वक़्त के बा'द हर दर्द दवा बन जाता है
मगर न जाने क्यूँ
ये दर्द तो बढ़ता जाता है
मुझे सुकून नहीं मिल पाता है
कैसी ज़ुल्मत बढ़ती जाती है
मेरी हिम्मत टूटती जाती है
जब लौट के तुम नहीं आती हो
ये दीवाली क्यूँ आ जाती है
मुझ को ये मालूम भी है
लौट के नहीं कभी आते हैं
अब तुम जिस जहाँ में रहती हो
पर तुम कब जहाँ में रहती हो
तुम तो आब ओ हवा में बहती हो
ये तेरा भैया तेरे पापा तेरी मैया
ये चंदा तारे जुगनू दीपक फूल ओ कलियाँ
ये सूनी गलियाँ और हम सब
तुझ को खोजते रहते हैं
हम सब तुझ को सोचते रहते हैं
सब से कहते रहते हैं
यहीं है वो कहीं नहीं गई है
वो मेरे दिल में रहती है
वो मुझ से मिलती रहती है
ख़्वाबों में
वीरान दिल के उजड़े गुलशन में
मेरे तन में मेरे मन में इस चमन में
होली के रंगों में पिचकारी में गुब्बारों में
दिवाली की फुलझड़ियो में चकरी में अनारों में
रंगोली के रंगों में दिए में लड़ियों में
खिड़की पर बैठी गिलहरी में चिड़ियों में
नौ रातों की नौ देवियों में जिमती है
पहले आरती करती थी अब कराती है
मुझ को बेहद रुलाती है
मुझे भैया कह के बुलाती है
छत की कड़ी में दीवार की घड़ी में
हर पल टक-टक करती है
मेरे भीतर मेरे दिल के ऑंगन में खेल खेलती
वो हर पल बक-बक करती है
ठंडी रात के घोर सन्नाटे में वो मेरी ग़ज़लें गाती है
आज खुल्द में क्या-क्या हुआ रात को आके बताती है
मैं गले लगाने को उठता हूँ
आँख खुलती है गुम हो जाती है
ऐसा होते हुए
मुझ को रोते हुए
एक साल हो गया















