jin par mujhe din raat ulfat chaahaton par aas hai | जिन पर मुझे दिन रात उलफ़त चाहतों पर आस है

  - Danish Balliavi

जिन पर मुझे दिन रात उलफ़त चाहतों पर आस है
उनको नहीं लगता कि ये इक शख़्स भी कुछ ख़ास है

वो मुझको अपने आप से इतना जुदा क्यूँ रखते हैं
शायद नहीं मालूम उनकी यादें मेरे पास है

वो भूल जाए मुझको लेकिन मैं तो बिल्कुल भी नहीं
सब जानते हैं मेरी उलफ़त में यही इख़्लास है

मैं तो बहुत शिद्दत से उनको दिल से चाहा था मगर
दिल तोड़ कर कहते हैं वो मुझ सेे ये सब बकवास है

वो ठुकरा कर उलफ़त को मेरी यूँँ मगन में हैं बहुत
''दानिश'' मुझे तो आज भी इस दर्द का अहसास है

  - Danish Balliavi

Good night Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Danish Balliavi

As you were reading Shayari by Danish Balliavi

Similar Writers

our suggestion based on Danish Balliavi

Similar Moods

As you were reading Good night Shayari Shayari