मेरे होंठों के तबस्सुम में ग़ज़ल देखोगेये मेरे साथ फ़क़त आज न कल देखोगेकल तलक ख़्वाब में करता था मैं जिस की तामीरअब से कमरे में मेरे ताज-महल देखोगे— Danish Balliavi