पड़ी जब से मुर्शद की मुझ पर नज़र हैसहज हो गया ज़िन्दगी का सफ़र हैखंडर वो भी तीरथ-सा पूजा गया फिरजहाँ से भी गुज़रा ये कामिल अगर है— DILBAR