तेरे फूलों को किताबों में छुपा रक्खा है
तेरी तस्वीर को सिरहाने लगा रक्खा है
तुझ से मिल कर के गले रख दिए अलमारी में
तेरी ख़ुशबू को लिबासों में दबा रक्खा है
उम्र भर हाथ ये तेरा नहीं है मेरा मगर
ये भी काफ़ी है के कुछ देर थमा रक्खा है
— Dipendra Singh 'Raaz'















