हँसते हुए चेहरों को कमल कौन कहेगाजब हम ही न होंगे तो ग़ज़ल कौन कहेगाये फ़िक्र मुझे उस से बिछड़ने नहीं देगीमैं हूँ न हमेशा उसे कल कौन कहेगा— Dipendra Singh 'Raaz'