ज़मीं का सिलसिला सिर्फ़ आसमाँ तक हैउदासी क्या कहा जाए कहाँ तक हैयहाँ से ले के अन्दाज़न वहाँ तक हैअकेलापन मकाँ से ला-मकाँ तक है— divya 'sabaa'