चराग़ों से कुछ तो चुराया गया है
जो थी आग उस को बुझाया गया है
लिखा था जिन्हें सिर्फ़ अपने लहू से
मिरे उन ख़तों को जलाया गया है
हज़ारों दफ़ा उस ने की बे-वफ़ाई
मुझे बे-वफ़ा क्यूँ बताया गया है
ख़बर ये मिली है कि मेरे ही घर में
किसी ग़ैर को अब बसाया गया है
मुझे ही सता कर मुझे ही रुला कर
ये इल्ज़ाम मुझ पर लगाया गया है
तुम्हें क्या बताऊँ मोहब्बत में 'रावत'
मुझे किस क़दर आज़माया गया है
— Divyansh Rawat














