मेरा साया
मेरे क़द से बड़ा है
लेकिन जब
रौशनी का ज़ाविया बदलेगा
साया छोटा हो जाएगा
मेरा साया
रौशनी का ग़ुलाम है
— Ehtisham Akhtar
मेरे क़द से बड़ा है
लेकिन जब
रौशनी का ज़ाविया बदलेगा
साया छोटा हो जाएगा
मेरा साया
रौशनी का ग़ुलाम है
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