"नहीं मिलेगी"

ख़ुद को भले निसार कर लो
चाहे जितना प्यार कर लो
साँसे भी तुम उधार कर लो
बहता दरिया पार कर लो
फिर भी मुहब्बत करते हो जिस से
तुम्हें वो लड़की नहीं मिलेगी

कोई जादुई किताब पढ़ लो
रब से चाहे जितना लड़ लो
कोई ऊँचा पहाड़ चढ़ लो
मन में कितने ही स्वप्न गढ़ लो
फिर भी मुहब्बत करते हो जिस से
तुम्हें वो लड़की नहीं मिलेगी

भले ही अपने ख़्वाब नोचो
या फिर कोई लम्हा दबोचो
देर रात तक उस को सोंचो
उस के लिए अपना वक़्त बेचो
फिर भी मुहब्बत करते हो जिस से
तुम्हें वो लड़की नहीं मिलेगी

ख़ुद पर भले सितम कर लो
अपनी आँख भी नम कर लो
अपने दायरे कम कर लो
अपने हिस्से ग़म कर लो
फिर भी मुहब्बत करते हो जिस से
तुम्हें वो लड़की नहीं मिलेगी

भले ही इश्क़ को अजीब मानो
हर किसी को रकीब मानो
उस को अपने क़रीब मानो
बेहतर अपना नसीब मानो
फिर भी मुहब्बत करते हो जिस से
तुम्हें वो लड़की नहीं मिलेगी

जियोगे तुम इक अज़ाब ले कर
सिर्फ़ उस का ख़्वाब ले कर
हर लम्हे का हिसाब ले कर
चेहरे पर इक नकाब ले कर
फिर भी मुहब्बत करते हो जिस से
तुम्हें वो लड़की नहीं मिलेगी

— Om Shukla

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