चुप कर ख़्वाबों के सौदागर सो जाएँगे
हम उस की नींदों से उठ कर सो जाएँगे
तुम मेरे ख़्वाबों में आ कर बात करोगी
ऐसा है तो फिर हम अक्सर सो जाएँगे
दोनों कश्कोलों में भरते हैं चेहरों को
रात को इनका शरबत पी कर सो जाएँगे
लंबी बहुत है रात जुदाई सो जाओ ना
हम ये सारे तारें गिन कर सो जाएँगे
सारा काम हमारा सोने जगने वाला
यादों में नींदों से जग कर सो जाएँगे
— gabruu govind















