ख़ुद को तन्हा पाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगाजीते जी मर जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगातुम मजनूँ सा रक़्स करोगे और फ़रहाद सा पागलपनतुम आशिक़ कहलाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा— gabruu govind