दिल की नय्या दो नैनों के मोह में डूबी जाए

डग-मग डोले हाए रे नय्या डग-मग डोले हाए

काले काले मेघा बरसें कुल धरती मुस्काए
सोंधी माटी की ख़ुशबू से सारा जग भर जाए

तन भी भीगे मन भी भीगे सावन रस बरसाए
शीतल शीतल जल बिरहन के मन में आग लगाए

ये मौसम पागल पुरवय्या मन मुद्रा छलकाए
बिन चिट्ठी बिन पाती के ही काश सजन आ जाए

गोरी सुन के नाम सजन का हौले से शरमाए
जैसे गगन पे सुब्ह सवेरे पहली किरन लहराए

ख़ुशबू का वो झोंका बन के सहन-ए-चमन महकाए
मय-ख़ाने में बन के नशा वो हर दिल पे छा जाए

— Ghaus Siwani

More by Ghaus Siwani

Other ghazal from the same pen

See all from Ghaus Siwani →

Aag Shayari Collection

Shers of aag shayari collection.

All Aag Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling